गोण्डा संवाददाता सतीश वर्मा

गोंडा।आरक्षण तय होने के बाद अब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सियासत जोर पकड़ रही है। काफी समय तक अनारक्षित रहने वाली कई पंचायतें आरक्षित हो गई हैं, इसके बाद अब पंचायत के धुरंधर दूसरी जगह सियासत का ठौर तलाश रहे हैं। वहीं अभी भी लोग आरक्षण में बदलाव की उम्मीद से विकास भवन का चक्कर काट रहे हैं। फिलहाल आपत्तियों के निस्तारण की गुंजाइश कम होने के कारण क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए भी कई दावेदारों ने तैयारी शुरू कर दी है।
शहर से सटी पूरे शिवाख्तावर पंचायत पहली बार आरक्षित हुई है। यहां से प्रधान की तैयारी कर रहे दावेदार अब जिला पंचायत व बीडीसी के लिए तैयारी करने का मन बना रहे हैं। इसी तरह कई बड़ों के गांवों में भी आरक्षण की गाज गिरी है, इससे वह भी दूसरे पदों के चुनाव में दांव अजमा सकते हैं। जिले में 1204 पंचायतों में चुनाव होना है। इसमें तरबगंज की खानपुर पंचायत भी पहली बार आरक्षित हुई है। आरक्षण में जाने से अब कुुछ तो अपने करीबी को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कुछ दावेदार आरक्षण में बदलाव के लिए दौड़ रहे हैं।

फिलहाल आरक्षण के बाद पंचायतों में सियासत तेज हो गई है। झंझरी का एकमा गांव इस बार पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हुआ है और वहां पर आबादी कम है। ऐसे में पसंद का प्रत्याशी लड़ाने के लिए आपस में खींचतान मची हुई है। ऐसे कई गांव में सियासी घमासान मचा हुआ है। 200 गांव ऐसे हैं जहां पर बड़ों की दखल रहती थी, लेकिन आरक्षण ने पंचायत के सियासतदानों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। वह प्रत्याशी तय करने के लिए पंचायत तक कर रहे हैं जिससे कोई उनके पक्ष का व्यक्ति मैदान में आ सके।
आरक्षित पंचायतों में खड़ाऊ राज के लिए दांवपेच
पहली बार अनूसूचित जाति या फिर पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हुईं पंचायतों में सियासतदान अपने यहां काम करने वालों को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे प्रधान कोई भी बनेगा, लेकिन खाते की चाभी उनके हाथ में रहेगी। ऐसे में एक बार फिर जिले में खड़ाऊराज बड़े स्तर पर होने की आशंका लगाई जा रही है। वजीरगंज के पेंडराही में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला की सीट होने के बाद वहां अपने पसंद के व्यक्ति को चुनाव में मैदान में उतारने की कवायद तेज हो गई है।इसी तरह करनैलगंज के पचरमी गांव में अन्य पिछड़ा वर्ग की सीट होने के बाद किसी ऐसे व्यक्ति को मैदान में उतारने की तैयारी है जो उनके इशारे पर काम कर सके। छपिया की पजिजिया बुजुर्ग पंचायत अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है और मनकापुर का मिर्जापुर रामनाथ गांव अनसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है यहां भी प्रत्याशी तय किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हर ब्लॉक में 10 से 20 पंचायतों में खड़ाऊ राज कायम करने के संकेत मिल रहे हैं।

महिलाओं की 409 सीटों पर धुरंधरों की नजर

जिले में 409 पंचायतें ऐसी हैं जहां महिलाएं ही प्रधान पदों पर लड़ सकेंगी। इसमें 71 सीटें अनूसूचित जाति महिला के लिए हैं तो 112 अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके साथ ही सामान्य महिला के लिए 226 सीटें आरक्षित हो गई हैं। यहां पंचायत के धुरंधर अपने परिवार से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। जिले में कुछ ही महिला प्रधान हैं जो खुद काम देखती हैं, बीते साल में भी तीन सौ से अधिक महिला प्रधानों ने घर की चौखट नही लांघी। प्रधान पदों का काम उनके पति, ससुर या परिवार के लोग ही देखते रहे। इस बार भी बड़ों के घरों की महिलाएं दावेदारी करेंगी, लेकिन काम उनके परिजन ही देखेंगे।
प्रधानी से बाहर तो क्षेत्र पंचायत पर लगाएंगे दांव
आरक्षण तय होने के बाद जिला पंचायत के 65 पदों पर तो सामान्य घमासान ही रहेगा। माना जा रहा है कि इसके पीछे जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य होना है। कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थन से ही वर्ष 1995 के बाद से अध्यक्ष पद पर लोगों का निर्वाचन होता रहा है। केवल वर्ष 2015 में सपा के पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह अपनी पुत्र वधू को अध्यक्ष बनाने में सफल रहे, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया और फिर कैसरगंज सांसद की पत्नी केतकी सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। इस बार तो तय है कि कैसरगंज सांसद का दबदबा कायम रहेगा। इससे जिला पंचायत सदस्य के बजाए क्षेत्र पंचायत सदस्य के 1612 पदों पर लोगों की नजर टिकी है। जो प्रधान पद के दावेदारी से बाहर हो गए हैं वह क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए किस्मत अजमाने की तैयारी में हैं।
पुलिस ने भी गांवों में बढ़ाई निगरानी
पंचायत चुनाव का आरक्षण तय होने के बाद अब पंचायत चुनाव की घोषण 17 मार्च के बाद कभी भी होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि 20 या 22 मार्च तक चुनाव की तारीख जारी हो सकती हैं। ऐसे में पुलिस व प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। ब्लॉकवार अधिकारियों की तैनाती करने की कवायद प्रशासन की ओर से हो रही है, वहीं पुलिस ने 17 थानों के करीब 1200 पुलिस कर्मियों को गांवों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। पंचायत चुनाव की शांति में खलल डालने वालों को पाबंद करने और शस्त्र लाइसेंसों की जांच करने के लिए कार्रवाई हो रही है। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने पुलिस व मजिस्ट्रेटों को बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए थानों में बैठक करने और गावों के बारे में फीडबैक लेने की कवायद शुरू कर दी है।

पंचायत चुनाव की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

आरक्षण पर आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया 15 मार्च तक पूरी हो जाएगी। मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है, मतदाता सूची भी 15 मार्च तक पूरी हो जाएगी। इसके साथ ही बेहतर व्यवस्था के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। –

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