80% विस्थापितों को रोजगार देने के आदेश को ताक पर रखकर कंपनियां कर रही मनमानी।

सोनभद्र। जिले के ऊर्जांचल परीक्षेत्र में स्थित नार्दन कोलफील्ड के कोयला खदानों में ओबी हटाने का कार्य कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों व सीएचपी कार्य करा रही कंपनियों द्वारा विस्थापितों व स्थानीय प्रभावित जनता को रोजगार समायोजन न किए जाने पर वाराणसी स्नातक खंड विधान परिषद सदस्य आशुतोष सिन्हा ने पत्र के माध्यम से सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने का प्रयास किया है। श्री सिन्हा ने अपने लिखे पत्र में एनसीएल एवं आउटसोर्सिंग कंपनियों के बीच 2006 में हुए 80% विस्थापित व स्थानीय लोगों को रोजगार दिए जाने के समझौते का भी मजाक बनाकर रख दिया है और सभी नियमों को ताक पर रखकर बिचौलियों के माध्यम से बाहरी लोगों को रोजगार में समायोजित किया जा रहा है। वहीं जिनकी जमीन और घर इन खदानों में चली गई वह सभी रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

ऊर्जांचल में चार दशकों से विस्थापन का दंश झेल रहे परिवारों के बेरोजगार युवकों को दरकिनार कर बाहरी लोगों को रोजगार दिए जाने से जनता में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रहा है, जो कभी भी ज्वालामुखी बनकर फूट सकता है। ऐसे में तत्काल कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनता के कोप भाजन का शिकार जनप्रतिनिधि से लेकर कंपनियों के अधिकारी हो सकते हैं।

श्री सिन्हा ने मुख्यमंत्री के साथ कोल मंत्रालय व एनसीएल प्रबंधन से मांग किया कि ऊर्जांचल के 80% बेरोजगार नवयुवकों को रोजगार में समायोजित करने का प्रयास किया जाए नहीं तो व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। जनहित के मुद्दों पर सुबह के मुखिया योगी आदित्यनाथ से निवेदन है कि तत्काल प्रभाव से कंपनियों को स्थानीय युवाओं के नौकरी हेतु आदेश पारित करें।

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