देशभर में महंगाई चरम सीमा पर है, जिससे लोगों का आर्थिक बजट बिगड़ता जा रहा है। पेट्रोल, डीजल व एलपीजी सिलेंडर सहित खाद्य पदार्थों के दाम भी बेलगाम हैं, जिससे आर्थिक पहिया डगमाता जा रहा है। इस बीच अगर आप सरसों तेल के खरीदार हैं तो फिर यह खबर आपके लिए बड़े ही काम की है।

सरसों तेल की कीमत में इन दिनों गिरावट देखने को मिल रही है। कीमत गिरने से लोगों के चेहरे पर काफी रौनक दिखाई दे रही है, जिससे खुदरा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। इतनी ही नहीं देशी तेल के साथ मूंगफली और बिनौला तेल के दाम स्थिर दिख रही है।

बाजार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मलेशिया एक्सचेंज में सुबह के कारोबार में बाजार सात प्रतिशत टूटने के बाद फिलहाल 4.25 प्रतिशत कमजोर है। शिकागो एक्सचेंज में फिलहाल 1.5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। विदेशी बाजारों की इस गिरावट के कारण सोयाबीन डीगम, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

विदेशों में बाजार टूटने के बीच आयातित तेलों के मुकाबले देशी तेल तिलहनों के दाम में मामूली गिरावट देखने को मिली। सरसों की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। आने वाले त्योहारों के दौरान सरसों की मांग प्रतिदिन 4-4.25 लाख बोरी की होने की संभावना जताई जा रही है। सरसों की आवक घटकर 2-2.25 लाख बोरी की रह गई है। आगे जाकर सरसों की कमी महसूस की जायेगी और इस तेल का कोई विकल्प भी नहीं है।

इन्हें झेलना पड़ रहा नुकसान

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में गिरावट की वजह से सोयाबीन तेल तिलहन की कीमत गिर गई। आयातकों ने जिस भाव पर सोयाबीन और पामोलीन तेल की खरीद की हुई थी। बाजार टूटने के बाद उन्हें आयात भाव के मुकाबले 40-50 रुपये किलो नीचे भाव पर अपना आयातित तेल बेचना पड़ रहा है। दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट आने के बीच इन आयातकों को अपने कर्ज के एवज में अधिक धनराशि का भुगतान करना पड़ रहा है।

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