सिंगरौली: जनता की शिकायत को लेकर कोई भी सरकारी महकमा कितना गंभीर है यह बताने की जरूरत नहीं है आम जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं को लेकर दिन रात जूझती रहती है फिर भी खुद को जिम्मेदार बताने वाले जनप्रतिनिधि से लेकर जिम्मेदार पदों पर आसीन सरकारी अमले के मुलाजिम को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है यह हम नहीं कह रहे बल्कि आए दिन सामने आने वाले मामले बता रहे हैं

ऐसा ही एक मामला सिंगरौली जिले के जिला मुख्यालय स्थित बैढ़न से निकल कर सामने आया है दर्शन जिला मुख्यालय स्थित रहने वाले एक नागरिक के द्वारा बिजली विभाग की उदासीनता को लेकर सबसे पहले बिजली संबंधी शिकायत 1912 में कराई गई जिस पर बिजली विभाग की तरफ से कोई भी ठोस पहल नहीं दिखा जिससे नाराज होकर पीड़ित ने संबंधित मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 में अपनी शिकायत दर्ज कराई 1912 की कंप्लेन को लेकर बिजली विभाग ने सक्रियता तो नहीं दिखाई परंतु सीएम हेल्पलाइन में रैंकिंग पर सवाल खड़ा होते देख बिजली विभाग के अधिकारियों के हाथ पैर फॉलो थे जिसके बाद उन्होंने बिजली उपभोक्ता को फोन कर शिकायत कटवाने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया

मामला यहीं तक नहीं रोका बिजली विभाग के कर्मी कभी खुद को जूनियर इंजीनियर बता कर तो कभी बिजली विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर रौब डालना चाहा जिसका नतीजा यह हुआ कि पीड़ित के द्वारा मामला बंद करने की बजाय बिजली विभाग के अधिकारियों को लेकर सीएम हेल्पलाइन में ही दोबारा शिकायत दर्ज करा दी जिसके बाद जैसे बिजली विभाग के अधिकारियों में हड़कंप सा मच गया।

इस मामले पर उपभोक्ता के द्वारा बिजली विभाग से लगातार आ रहे फोन से परेशान होकर विभागीय कर्मियों को खरी-खोटी सुना दी मामले पर बात करते हुए उपभोक्ता ने बताया कि उनकी शिकायत पर बिजली विभाग के द्वारा कोई भी सक्रियता नहीं दिखाई गई जिससे आहत होकर उन्होंने विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई एवं उपभोक्ता ने बताया कि 1912 में कंप्लेंट करने के बाद जिस शिकायत पर बिजली विभाग को हरकत में आ जाना चाहिए था

वह सक्रियता बिजली विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों में नहीं दिखी भीषण गर्मी में परेशान उपभोक्ता के घर की बिजली ठीक होने में विभाग ने 20 घंटे का समय लगा दिया जबकि उपभोक्ता बिजली विभाग के प्रमुख कार्यालय से महल कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही स्थित है ऐसे में जिले के ही शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर बिजली विभाग की सक्रियता एवं कार्यशैली पर सवाल खड़ा होना लाजमी है

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