सिंगरौली:कमाई के मामले में कलेक्टर से ज्यादा कमाई कर रहे हैं जिले के पटवारी
बिना सुविधा शुल्क के नहीं होता कोई काम


सिंगरौली: जमीनों के संबंध में जमीनों का कार्य करने वाले पटवारी आज से ही नहीं पूर्व से ही चर्चाओं में है इनकी का रास्ता नियों को यदि देखा जाए तो शायद काश्तकारों के लिए पटवारी ही सब कुछ होता है परंतु कई बार अपने कार्य को कराने के लिए काश्तकारों को इन पटवारियों के लगातार कई चक्कर लगाने पड़ते हैं और जब तक की सुविधा शुल्क उपलब्ध ना हो जाए तब तक काश्तकारों का कार्य होना शायद संभव ही नहीं है यह हम नहीं कह रहे बल्कि लोक सेवा केंद्र में रेवेन्यू से जुड़े हुए कई ऐसे आवेदन आज भी धूल फांक रहे हैं जो कि काश्तकारों के द्वारा कई लंबे समय से आवेदन देकर इस आस में बैठे हैं

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कि प्रशासनिक व्यवस्था में उनका कार्य हो सकेगा एक तरफ जहां लोक सेवा केंद्र का उद्देश्य लोगों को सस्ता एवं आसान रास्ता बताया गया था कि अब लोगों को भारी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा परंतु आज की स्थितियां पूर्व के ढर्रे पर ही चल रही हैं और शायद इसके जिम्मेदार प्रशासनिक अमला एवं विभाग प्रमुख सहित जिले के प्रमुख अधिकारी भी हैं। जैसा कि सभी को ज्ञात है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है एवं कृषि प्रमुख व्यवसाय है

ऐसे में जमीनों की देखरेख एवं आए दिन होने वाले जमीन संबंधी विवाद को लेकर लोग तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालय तक के चक्कर लगाते रहते हैं कि उन्हें विभाग की तरफ से कुछ राहत दी जाएगी परंतु विभाग के समक्ष आवेदन करना ही एक समस्या को आमंत्रण देने जैसा होता है आवेदन करने के बाद आवेदन कर्ता को विभाग के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पटवारी जब तक उन्हें चढ़ावा चढ़ाया जाए तब तक काश्तकारों का काम हो रहा तो मान लो टेढ़ी खीर है।

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चर्चाओं में बैढ़न पटवारी

इन दिनों बैढ़न पटवारी की चर्चा चारों ओर है लगातार चर्चाओं में बने रहने के पीछे काश्तकार की समस्या एवं सुविधा शुल्क ।बैढन हल्का पटवारी की मनमानी से सरकार की मंशा पर पानी फिरता नजर अर रहा है। काष्तकारों और भूमि स्वामियों से बीना सुविधा शुल्क लिए बैढन पटवारी द्वारा कोई काम नही किया जाता है। बैढन पटवारी की अवैध कमाई इतनी अधिक है कि शहर के पाश इलाके में करोडों की हवेली तान दी है। इतना ही नही साले व अन्य रिष्तेदारों के नाम करोडों की प्रापर्टी बना डाली है।

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बैढन हल्का पटवारी की मनमानी से परेशान लोगों ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और लोकायुक्त से जांच कराने की मांग की है। बताया जाता है कि सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढन में पदस्थ हल्का पटवारी उमेश नामदेव द्वारा बैढन हल्का क्षेत्र का कामकाज करने के लिए कई दलाल रखे है। जिनके द्वारा काष्तकारो और भूमिस्वामियों से काम के बदले मुँहमांगी सुविधा शुल्क नही देने पर तारीख पर तारीख देकर दौडाते रहते है। बताया जाता है कि बैढन हल्का पटवारी पैसे के आगे माननीयों की शिफारिस भी अनसुना कर देते है। बताया जाता है कि पटवारी और उनके दलालो द्वारा मजबूर कर लोगों से मनमानी सुविधा शुल्क वसूल किया जाता है।

मोटी रकम के बिना नहीं होता कोई काम

बताया जाता है कि बैढन हल्का पटवारी को जिसने मोटी रकम पकडाई उसी की तरफ जमीन कर दी जाती हैैैै। बैढन षहर की बेशकीमती जमीनों को पाने सीमांकन में इधर-उधर खिसकाने के नाम पर पटवारी द्वारा लाखों रूपये में सौदेबाजी की जाती है। मुँहमांगा सुविधा शुल्क नही देने वालों को जहां जमीन से हाथ धोने की नौबत आ जाती है, वही करोडो रूपये डूबने का भय बना रहता है। नतीजतन लोग मजबूर होकर पटवारी को सुविधा शुल्क देने के लिए विवष है।

ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से जांच की मांग

बैढन हल्का पटवारी की मनमानी से परेशान लोगो ने ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से जांच की मांग की है। लोगो का कहना है कि पटवारी की काली कमाई इतनी ज्यादा है कि पाश कालोनी पचखोरा में करोडो की आलीशान हवेली, साले व रिष्तेदारो के नाम 15 लाख से ज्यादा की लग्जरी स्कार्पियों वाहन और कई बेश कीमती प्लाट व चल अचल संम्पत्तियां अर्जित की है। जो इनकी आय से कई गुना है।

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जिसकी जांच एजेंसिंयों द्वारा कराई जाय तो इनकी काली कमाई की हकीकत सामने आने देर नही लगेगी। बताया जाता है कि सरकार व प्रशासन द्वारा आम काष्तकारों व भूमिस्वामियों के लिए कई सहूलियतें वाले नियम कानून बनाए है, लेकिन बैढन पटवारी की मनमानी के आगे सब बौने व बेअसर साबित हो रहे है। जिससे सत्तारूढ़ पार्टी से लोग खासे नाराज हैं।

लोक सेवा केंद्र में पड़े आवेदनों की जांच से स्पष्ट हो सकती है स्थिति

लोक सेवा केंद्र शहरी में जमीन संबंधी आवेदनों की संख्या एवं निस्तारण को लेकर यदि विभागीय अधिकारी जांच करें तो इस संबंध में सारी स्थिति स्पष्ट हो सकती है दरअसल कई महीनों से पढ़े आवेदनों पर अब तक जद्दोजहद करने के लिए विभाग को या संबंधित पटवारी को समय ही नहीं है हालांकि संबंधित पटवारी को काश्तकारों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है लोग कई दिनों से परेशान हैं

सीएम हेल्पलाइन में भी जमीन संबंधी शिकायतों की भरमार है समीक्षा बैठक के दौरान जिला कलेक्टर इस बात की समस्या तो जरूर करते हैं कि सीएम हेल्पलाइन में पड़ी शिकायतों का निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए परंतु उन शिकायतों की निपटने के पीछे का कारण कभी जानने का प्रयास नहीं किया गया

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