क्रेशर संचालकों पर प्रशासन की मेहरबानी,नियमों को रद्दी टोकरी में फेंक रहे हैं क्रशर संचालक,खनिज अधिकारी की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में

सिंगरौली : नियमों को दरकिनार कर जिस तरह से क्रेशर संचालकों के द्वारा खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है संबंधित मामले पर जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौन बैठे हुए हैं दरअसल मांगों को दरकिनार कर क्रेशर संचालक कार्य कर रहे हैं एक तरफ जहां शासन के द्वारा दिए गए नियमावली में पर्यावरणीय व्यवस्थाओं सहित कृषि क्षेत्र के आसपास रहने वाले रहवासियों को लेकर दी गई गाइडलाइन को भी रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया ।

मनमाने तरीके से क्रेशरों के संचालन में जनजीवन बेहाल, बीमारी की चपेट में आ रहे स्थानीय लोग, प्रदूषण, खनिज व जिला प्रशासन नहीं दे रहे ध्यान

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माड़ा क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक स्टोन क्रेशर प्लांट संचालित हैं। इन प्लांटों में सरकार के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रहीं हैं। इनकी मनमानी पर रोक लगाने वाले अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। क्रेशर प्लांट संचालन के लिए सरकार के नियम निर्धारित है लेकिन नियम का पालन नहीं किया जाता। बता दें कि माड़ा तहसील क्षेत्र के जोगियानी ग्राम में लगा यह क्रेशर प्लांट वहां बसी बस्ती के लोगों के लिए बीमारी की देन बना है।

पर्यावरण गाइडलाइन को कर रहे दरकिनार

प्रदूषण विभाग के नियमों को ताक पर रखकर प्लांअ चल रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि इस क्रेशर प्लांट में न तो बाउंड्रीवाल है

और नाही पेड़-पौधे, पानी का छिड़काव भी नहीं होता। फिर भी यह क्रेशर नियमों को ताक पर रखकर अफसरों के आशीर्वाद से चल रहा है। प्रदूषण इतना कि रोड से निकलने वाले वाहन तक नहीं दिखते। दोपहिरया वाहन चालक व राहगीर धूल के कड़ आंख में आने से कई बार भिड़ जाते हैं। वहीं पास में बस्ती के लोग क्रेशन के प्रदूषण से त्रस्त हो चुके हैं, लेकिन क्रेशर संचालक अपनी मनमानी पर उतारू है।

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क्रेशर प्लांट से उड़ेने वाली धूल डस्ट से आसपास रहने वाले ग्रामीणों को प्रदूषण से बचाने का कोई इंतजाम नही किया जा रहा।

बता दें कि क्रेशर संचालको द्वारा लाइसेंस लेने के लिए नियम का पालन करने की लिखित अनुमति दी जाती है, इसके बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तहसील क्षेत्र के रसूखदारों के आधा दर्जन क्रेशर प्लांट संचालित हैं। कई संचालक शासन की ओर से निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते हैं, जिसकी सजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों ने क्रेशर से उड़ रही धूल को बंद कराने प्रशासन से मांग की है।

दबंगई पर उतारू कृषक संचालक देते हैं मारपीट की धमकी

नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह से क्रशर संचालकों के द्वारा मनमानी की जा रही है यह सिलसिला यहीं पर नहीं रुका जिन क्रशर संचालकों को नियमों को ध्यान में रखकर क्रेशर संचालित करना था इनकी मनमानी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इन्हें सिर्फ अपनी मोटी कमाई से ही मतलब होता है फिर चाहे किसी भी तरह के नियम कानून बने हो उनका उल्लंघन होता है

उन्हें किसी से मतलब नहीं होता हां जब कई बार स्थानीय लोग संबंधित मामले को लेकर क्रेशर संचालकों के समक्ष जाकर उन्हें रोकने का प्रयास करते हैं उनके द्वारा उनके गुर्गे ग्रामीण क्षेत्र की जनता के साथ बदसलूकी गाली गलौज एवं मारपीट से भी पीछे नहीं हटते एक तरफ जहां ग्रामीण प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर है तो वहीं दूसरी तरफ क्रेशर संचालकों की दबंगई से भी काफी परेशान है

विस्फोटकों का का प्रयोग जोरों पर

जिलेभर में संचालित क्रेशर प्लांट में पत्थरों के उत्खनन को लेकर क्रशर संचालकों के द्वारा व्यापक पैमाने पर विस्फोटकों का प्रयोग किया जाता है

संचालकों के द्वारा प्रयोग में लाए जा रहे विस्फोटकों की मात्रा ज्यादा होने के कारण विस्फोट की तीव्रता भी ज्यादा होती है ऐसे में खदानों से निकले पत्थरों के टुकड़े क्रेशर प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों के घरों में गिर रहे हैं जिस कारण से कई लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है आमतौर पर क्रेशर संचालकों के द्वारा ब्लास्टिंग का समय दोपहर 12:00 से 1:00 के बीच में निर्धारित किया गया है जिस समय या ब्लास्टिंग का दौर शुरू होता है उस समय ग्रामीण अपने घरों में छुपने को मजबूर होते हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की हानि ना हो

ग्रामीणों ने कहा

जोगियानी क्षेत्र के रहने वाले लोगों ने बताया कि क्रेशर संचालकों की मनमानी यों को लेकर बेहद परेशान हैं एक तरफ जहां हवा के साथ धूल मिट्टी के कर उनके घरों में लगातार जा रहे हैं उसके साथी ब्लास्टिंग के समय हवा में उड़ते पत्थरों से उनके घरों की छत एवं खप्पर टूटने लगे हैं

जिसकी शिकायत क्रेशर संचालकों से कई बार की गई परंतु क्रेशर संचालक अपनी मनमानी करते आ रहे हैं ऐसा भी नहीं है कि ग्रामीणों ने इसकी शिकायत प्रशासन के समक्ष नहीं कि कई क्षेत्रों में संचालित क्रशर प्लांट के संचालकों की शिकायतें भी जिला प्रशासन के समक्ष लिखित तौर पर कई ग्रामीणों के द्वारा की गई परंतु क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से इस तरह की घटनाएं निकल कर सामने आना अब आम बात हो गई है

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