Singrauli : अनुशासन की दुहाई देने वाला पुलिस महकमा अनुशासन को तवज्जो देता है एक तरफ जहां पुलिस विभाग को कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली है पर क्या हो अगर की यही पुलिस विभाग की अधिकारी खुद भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाएं एवं विभाग बजाय कार्रवाई करने के जांच का हवाला देकर बचाने में लग जाए।

यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि विगत कुछ माह उजागर हुए पुलिस विभाग में शासकीय राशि के गबन के मामले में एक तरफ जहां अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के द्वारा मामले की जांच करने पर पाया कि पुलिस विभाग के अधिकारी के द्वारा शासकीय राशि का गबन बड़े पैमाने पर कर दिया गया जांच में सिद्ध होने के बाद भी मामले पर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को बस इतना ही तवज्जो दिया कि मामला अब विभागीय जांच पर अटका हुआ है

अब इसे क्या कहा जाए कि विभाग कार्रवाई के मूड में है या फिर मामला दबाने के मूड में । इसे तो एक शब्द में यही कहा जा सकता है कि साथ की राशि गबन के मामले में विभाग अब संरक्षण दे रहा है

जाने क्या था मामला

दरअसल नीरज सिंह निवासी singrauli बिंद नगर सेक्टर नंबर 4 जिला सिंगरौली के द्वारा रक्षित निरीक्षक पद पर आशीष तिवारी के विरुद्ध शासकीय राशि का गबन करने के विषय में शिकायत पत्र पुलिस अधीक्षक महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था संबंधित मामले की शिकायत पत्र पर जांच अधिकारी राजीव पाठक अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ने मामले की जांच कर पुलिस अधीक्षक के समक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जांच के दौरान यह पाया गया कि रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी जिला सिंगरौली द्वारा जानबूझकर पुलिस विभाग के विभिन्न मदों से शासकीय राशि को विनोद कुमार यादव के नाम से स्वयं ही खाता खुलवाया गया

जिसमें कि 1069795 रुपये प्राप्त किया गया एवं रक्षित निरीक्षक के निजी खाते में ₹10000 यूपीआई के माध्यम से प्राप्त किए गए।

शासकीय राशि का गबन एवं पद का दुरुपयोग

रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी ने जिस तरह से शासकीय राशि का गबन किया यह मामला कहीं ना कहीं साफ तौर पर पद का दुरुपयोग कहा जा सकता है जांच रिपोर्ट कि यदि माने तो पुलिस विभाग के अधिकारी के द्वारा किए गए जांच में जिन तथ्यों का हवाला दिया गया है

वह तथ्य इस बात की तरफ इंगित करते हैं कि इस पूरे मामले में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार कर विभाग को हानि पहुंचाने का कार्य किया गया यह पूरा कार्य एक सुनियोजित तरीके से किया गया दिनांक 9 मार्च 2022 को यह रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया गया था तब से लेकर अब तक एक लंबा समय बीत चुका है लंबा समय बीत जाने के उपरांत आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की कोई भी एफआईआर विभाग के द्वारा नहीं की गई है

अब इसमें विभागीय अधिकारियों की सरपरस्ती कही जाए या वित्तीय रूप से लेनदेन कर मामले दबाने का प्रयास किया जा रहा है अब तो यह भी जांच का विषय है कि इस संपूर्ण मामले में आखिरकार एफ आई आर दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हो रही है इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता भी संदेह के घेरे में है

तो क्या पुलिस विभाग रक्षित निरीक्षक बचाने के प्रयास में है

लगभग 1100000 रुपए की शासकीय राशि का गबन करने के उपरांत बेखौफ होकर घूम रहे रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी के के संबंध में प्राप्त शिकायत के आधार पर विभागीय अधिकारी राजीव पाठक के द्वारा की गई जांच में जहां पूरे घटनाक्रम को लेकर यह स्थिति साफ हो रही है कि singrauli रक्षित निरीक्षक के द्वारा इस पूरी घटना को सोची समझी साजिश के तहत घटना को अंजाम दिया गया उसके बाद मामला उजागर होने की स्थिति में संबंधित मामले को लेकर अब विभागीय जांच सीधी पुलिस अधीक्षक के द्वारा की जा रही है

अब इसे क्या कहा जाए ऐसे में गली चार्ट चौराहों पर यह चर्चा आम हो चुकी है कि पुलिस विभाग पुलिस महकमे में कार्य कर रहे  singrauli रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी के द्वारा शासकीय राशि गबन के मामले में अब पर्दा डालने की कोशिश विभाग के द्वारा की जा रही है लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि संबंधित राशि का गबन रक्षित निरीक्षक आशीष तिवारी मास्टरमाइंड तो है ही इनके साथ ही और भी कई लोग विभागीय कर्मी हो सकते हैं जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में उनका साथ दिया है

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