सिंगरौली:नशा करने वाले चाहे बच्चे हो या बुजुर्ग अपने नशा का सामान एवं उसका तरीका जरुर ढूंढ लेते हैं। नाबालिक बच्चों में अजीब तरह का नशा पनप रहा हैं। पूर्व में नशे के पदार्थ सिर्फ गिनी चुनी दुकानो में मिलते थे लेकिन अब नशे के अर्थ बदलने के साथ दुकानें भी बदल गई हैं।

अब तो नशेडिय़ो ने स्टेशनरी में बिकने वाला बोनफिक्स एवं व्हाइटनर भी नशे के रुप में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया हैं। सबसे ज्यादा इस नशे के करीब नाबालिग बच्चे ही नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि 11 से 16 वर्ष की उम्र के नाबालिग बच्चे स्टेशनरी मे मिलने वाले बोनफिक्स एवं व्हाइटनर को इस्तेमाल करते हैं। बच्चे रुमाल में बोनफिक्स को पूरा खाली करके बारी-बारी से एकांत जगह पर जाकर उस रुमाल को सूंघते हैं।

प्रतिबंध के बावजूद भी नहीं लगी रोक

नाबालिक बच्चों को बोनफिक्स स्टेशनरी की दुकानों पर बड़ी आसानी से प्राप्त हो रहे हैं।स्टेशनरी के विक्रेता चेहरा पहचान कर यह सामग्री देते हैं। कई ऐसे दुकानदार है जिनकी बिक्री अधिक नही होती वो यह सामान बेच कर दिन भर कमाई का एवरेज निकालने में लगे रहते हैंं। इस तरह के नशीले पदार्थ इस लिए उपयोग में लाए जाते हैं

क्योंकि इन पदार्थो में शराब जैसी बदबू नही आती और नशा शराब जैसा ही रहता हैं। युवा पीढ़ी एवं नाबालिग नशे की गिरप्त में जकड़ते जा रहे हैंंंं। या फिर यह कहे कि नशे की गिरफ्त में बचपन डूबता जा रहा।यह बच्चे नशे की लत में पड़कर अपना बचपन तबाह कर रहे हैं। सस्ता नशा करके अपना बचपन पढ़ाई की जगह नशे में गुजार रहे हैं

इन दिनों बचपन नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है।

नशा भी ऐसा जिसके बारे में उसे बेचने वाले भी अंजान हैं। भीख मांगने वाले, कबाड़ बीनने वाले अथवा ऐसे बच्चे जिसको लेकर अभिभावकों को उसकी कोई चिता नहीं होती, ये बच्चे फ्ल्यूड खरीदकर उसका नशा कर रहे हैं। इतना ही नहीं इन बच्चों को नशा का डोज दे अपराध की दुनिया में जबरन ठेला भी जा रहा है। ककहरा सीखने की उम्र में इन्हें अपराध का ककहरा पढ़ाया जा रहा है।

व्हाइटनर और सॉल्यूशन को कपड़े में रखकर नाक से सूंघने का शौक

शहर में भीख मांगने और कबाड़ बीनने वाले बच्चे अजीब किस्म के नशे का शिकार हो रहे हैं। दिन भर मेहनत करने के बाद ये नौनिहाल सॉल्यूशन (पंचर जोड़ने वाले टयूब में इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ), व्हाइटनर(स्याही से लिखा मिटाने वाला केमिकल) सूंघकर नशे में धुत हो जाते हैं।

बस स्टैंड, स्टेशन परिसर , सप्ताहिक बाजारों से लेकर, कबाड़ी हो की दुकानों के आसपास ऐसे बच्चों की खासी संख्या है। ये बच्चे साइकिल की दुकान या फिर किताबों की दुकानों पर जाकर सॉल्यूशन या फिर व्हाइटनर खरीदते हैं और उसे कपड़े पर डालकर बहुत जोर से सूंघते हैं। ऐसा करने से उन्हें नशा छा जाता है और वे किसी भी कोने में पड़े रहते हैं। ये बच्चे दिन में भीख मांगते तो कहीं कबाड़ इकट्ठा करते या फिर घरों से छोटे मोटे सामान चुराकर पैसे इकट्ठा कर शाम में नशा करते

बोन फिक्स क्विकफिक्स और आयोडेक्स तक का इस्तेमाल ये बच्चे नशे के रुप में करते हैं।

जिले में कई बुक स्टोर में बिक रहा नशे की सामग्री

सिंगरौली जिले में पुलिस अधीक्षक द्वारा नशे पर लगाम लगाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं शहर में अवैध शराब गाजा व हीरोइन (मादक पदार्थ) की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और अवैध कारोबारियों पर शिकंजा कसने का प्रयास कर रही है तो वही प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर कई स्टेशनरी दुकानदार नन्हे-मुन्ने बच्चों को आसानी से ऊंचे दामों पर बोनफिक्स वह सुलेशन उपलब्ध करा कर अपनी जेब भरते नजर आ रहे।

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