SINGRAULI/राजनीति ने किया प्रशासन का कद छोटा नतमस्तक हुआ प्रशासन

SINGRAULI: शासन की योजना अनुसार भूमिहीन एवं आवाज भी है निर्धन व्यक्तियों को घर प्रदान करने की सरकार की महत्वकांक्षी योजना में इन दिनों दलालों का बोलबाला दिखाई पड़ रहा है और इस पूरे काली खेल में शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है

दहशत संबंधित घटनाक्रम को लेकर शासन के अधिकारी ही संबंधित मामले में कई आदेश पारित कर चुके हैं परंतु मजाल किसी की शासकीय आदेश का पालन कोई करवातो ले ऐसा इसलिए भी संभव होता नहीं दिख रहा है कि संबंधित मामले पर शासकीय अधिकारियों की कलम एवं कार्यवाही ना होने के पीछे राजनैतिक संरक्षण की बात कही जा रही है

जानें पूरा मामला

दरअसल पूरा मामला SINGRAULI सिंगरौली जिले की चितरंगी जनपद क्षेत्र का है जिसमें चितरंगी के तमइ में रहने वाले सुरेश कुमार केवट के मकान के सामने स्थित शासकीय भूमि पर क्षेत्र के ही रहने वाले दबंग लल्लू अशर्फी शंकर अशर्फी ने सुरेश कुमार के घर के सामने ही शासकीय जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जिससे कि सुरेश कुमार केवट का निकासी प्रभावित हो गया

संबंधित मामले की शिकायत लेकर सुरेश के द्वारा तहसीलदार के समक्ष शिकायत की गई संबंधित मामले में शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार ने मकान निर्माण पर स्थगन आदेश दे दिया गया इसके साथ ही जबरन अवैध निर्माण किए जा रहे कार्य को हटाने का भी निर्देश जारी कर दिया तहसीलदार ने माना कि संबंधित निर्माणाधीन अवैध मकान से विवाद होने की संभावना है

जिसके मद्देनजर तहसीलदार चितरंगी के द्वारा विवाद ना हो पर शांति बनाए रखने के उद्देश्य प्रश्न अंकित भूमि पर अन आवेदक द्वारा किए जा रहे का बीच का स्कोर रोका जाना सही पाया गया एवं तहसीलदार के द्वारा संबंधित मामले पर कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को हटाया जाना एकमात्र विकल्प पाया गया

उपखंड अधिकारी ने मामले में किया हस्तक्षेप

संबंधित मामले को लेकर राजनीतिक दबाव के कारण संबंधित मामले में उपखंड अधिकारी चितरंगी के द्वारा कार्रवाई करते हुए आवेदक सुरेश कुमार केवट के द्वारा प्रस्तुत किए गए

आवेदन के मद्देनजर तहसीलदार अमृत को रावल के द्वारा पुलिस चौकी नोड़ीवा को अतिक्रमण हटाए जाने का आदेश पारित किया था संबंधित पत्र में उल्लेखित है कि आवेदित आराजी मध्यप्रदेश शासन में दर्ज है और उन आवेदकों के पास पट्टे की आराजी उपलब्ध है मध्यप्रदेश शासन की भूमि हड़पने की नीयत से अतिक्रमण किया जा रहा है जिस पर उपखंड अधिकारी ने 15 दिवस का अस्थाई स्थगन आदेश समाप्त करते हुए

अतिक्रमण हटाए जाने का निर्देश जारी कर दिया संबंधित मामले को लेकर उपखंड अधिकारी के द्वारा 16 अगस्त 2022 को पत्र जारी कर संबंधित शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है उसे नायब तहसीलदार वृत्त कुरावर को निर्देश दिया गया कि हल्से अतिक्रमण दो दिवस में हटाकर उपखंड अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करें ।

नायब तहसीलदार ने एसडीएम के आदेश को दिखाया ठेंगा

जिस तरह से पैसे एवं दबंगई एवं राजनैतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति के द्वारा अवैध तरीके से शासकीय भूमि को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है यह प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है तो वहीं दूसरी तरफ संबंधित मामले को लेकर उपखंड अधिकारी के द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देश का पालन न करना न्यायालय उपखंड अधिकारी चितरंगी के आदेशों की अवहेलना है

एक तरफ जहां संबंधित मामले को लेकर उपखंड अधिकारी के द्वारा जारी किए गए आदेश का पालन नहीं किया गया वहीं दूसरी तरफ अब तक कई दिन बीत चुके हैं जिस पर कि नायब तहसीलदार सहित तहसीलदार एवं उपखंड अधिकारी स्वयं संबंधित मामले पर मौन धारण किए हुए हैं इस पर उपखंड अधिकारी की भी कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है

आखिरकार काफी लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी आज तक न तो आदेशित अधिकारी के द्वारा इस मामले का संज्ञान लिया गया और ना तो संबंधित अधिकारी जिसके नाम पर आदेश जारी किया गया उन्होंने संबंधित मामले का संज्ञान लिया ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि संबंधित मामले में राजनीति हावी होती दिखाई पड़ रही है।

मामले की हुई जिला कलेक्टर से शिकायत

संबंधित मामले में कार्रवाई ना होने से पीड़ित ने संबंधित मामले को लेकर जिला कलेक्टर के समक्ष न्याय की गुहार लगाई है संबंधित मामले में कलेक्टर ने कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

बीते कई दिनों से चल रहे इस प्रकरण में एक तरफ जहां पीड़ित सुरेश कुमार लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने में मशगूल है

तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी सिस्टम में किस कदर गरीब एवं असहाय व्यक्तियों का मजाक उड़ाया जाता है यह सभी के सामने हैं। सिंगरौली जिले में यह मात्र एक शिकायत के तौर पर देखा जा सकता है परंतु सिंगरौली जिले की यही वास्तविकता है चितरंगी से लेकर जिला मुख्यालय तक का यही हाल है आज संपूर्ण सिंगरौली में राजनीतिक संरक्षण में किस कदर जिले के प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी कठपुतलियों की तरह नजर आ रहे हैं

यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है इस संपूर्ण मामले में यह स्पष्ट होता है कि बाहुबल एवं राजनीतिक संरक्षण में कुछ भी किया जा सकता है जिसकी इजाजत संविधान भी नहीं देता है उसे भी करना है तो सिर्फ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होना चाहिए

 

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