सिंगरौली मोटर एसोसिएशन की हफ्ते भर से जारी है हड़ताल Singrauli Motor Association’s strike continues for a week

2000 से ज्यादा ट्रकों के पहिए थमे

सिंगरौली: बीते सप्ताह भर से सिंगरौली जिले की रीड कहे जाने वाले कोयला ट्रांसपोर्ट में लगे ट्रकों के पहिए थम गए हैं आपको बताते चलें कि नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड की कोयला खदानों से निकलने वाला कोयला विभिन्न संयंत्रों सहित रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित कोल यार्ड में कोयला पहुंचाने वाले ट्रकों के पहिए थम गए हैं इसमें लगभग दो हजार से ज्यादा रखो का परिचालन पूरी तरह से ठप हो गया वही सिंगरौली Motor Association’s मोटर एसोसिएशन लगातार अपनी मांगों को लेकर हड़ताल में बैठा हुआ है जिसे देखने वाला कोई नहीं है चाहे वह कोयला उत्पादन के लिए जानी जाने वाली कंपनी नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड हो या फिर कोयले का डीओ प्राप्त करने वाले डीओ होल्डर हालांकि सिंगरौली.

Motor Association’s मोटर एसोसिएशन लगातार सिंगरौली में विगत कई वर्षों से कोयले का परिवहन करता आ रहा है एक तरफ जहां कोयले के परिवहन से सिंगरौली जिले के स्थानीय एवं आसपास के क्षेत्रों से लोगों को जिस किसी तरह रोजगार मुहैया हुआ था

 जिसमें कि कई घरों के चूल्हे जल रहे थे आमतौर पर सिंगरौली जिले के विस्थापित एवं जिले के ही व्यवसाय इस व्यवसाय में लंबे अरसे से जुड़े हुए हैं अब उन पर रोजी-रोटी का संकट आ पड़ा है जिसके विरोध में यह हड़ताल सिंगरौली मोटर एसोसिएशन के द्वारा की गई है

आखिर क्यों हुई हड़ताल

सिंगरौली मोटर एसोसिएशन से जुड़े व्यवसायियों सहित रघु को चलाने वाले चालक व परिचालक लगभग सप्ताह भर से हड़ताल पर हैं दरअसल सिंगरौली मोटर एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद कुर्वंशी ने बताया कि हमारी मांग है कि लगातार इस महंगाई में एक तो पहले से ही काफी कम दरों पर कोयला परिवहन किया जा रहा था जिस किसी तरह यह कार्य संचालित हो रहा था

अचानक उसमें सिंगरौली जिले से बाहर से आए व्यवसायियों ने आते से ही माल ढुलाई का भाड़ा ₹100 प्रति टन तक गिरा दिया ऐसे में अपने अधीनस्थ कार्य करने वाले मोटर चालक एवं परिचालक सहित मोटर व्यवसाय से जुड़े व्यवसायियों को काफी लंबा नुकसान सहन करना पड़ रहा है जिस पर सिंगरौली मोटर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुर्वंशी ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई है संबंधित हड़ताल से पूर्व प्रबंधन को पूरी तरह से आगाह किया गया था बावजूद किसी समाधान के इस पूरे मुद्दे पर किसी भी जिम्मेदार ने सुध नहीं ली ना तो डीओ होल्डर और ना ही कंपनी प्रबंधन ने। तय किए गए भाड़े को कम करने से काफी नुकसान की बात कही जा रही है

भाड़ा कम करने को लेकर नाराज हैं मोटर एसोसिएशन

सिंगरौली मोटर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुर्वंशी का संबंधित मामले में कहना है कि लगातार कई वर्षों से कोयला ट्रांसपोर्ट कर जिले के स्थानीय लोगों सहित खुद के लिए रोजगार का सृजन किया गया था परंतु अब धीरे-धीरे जिस तरह से डीजल के दाम आसमान छू चुके हैं उससे पहले जैसी कमाई नहीं रह गई है

अब कई वर्षों से एक ही कार्य में लिप्त होने के कारण अब दूसरे कार्य को कर पाना भी संभव नहीं है एक तरफ जिस किसी तरह से जमीन गिरवी तक रखकर ट्रक खरीदा गया परंतु बड़ी मुश्किल से अब ट्रकों का किस्त सहित ड्राइवर एवं क्लीनर को तनख्वाह देने के बाद मोटर मालिक गुजर-बसर कर रहे हैं मोटर एसोसिएशन के लोगों का कहना है कि जिले के बाहर से आए हुए व्यापारियों ने अचानक से ₹100 प्रति टन माल ढुलाई के भाड़े में कमी करके जिले के स्थानीय मोटर मालिक के साथ एक षड्यंत्र रचा गया है वह बिल्कुल भी बर्दाश्त योग्य नहीं है

 

सत्ता पक्ष एवं विपक्ष मामले पर हैं मौन

सप्ताह भर से चल रहे सिंगरौली मोटर एसोसिएशन की हड़ताल से जिले के राजनीतिक दलों ने जिस तरह से चुप्पी साधे बैठे हैं उसे देखकर या प्रतीत हो रहा है कि सिंगरौली जिले के स्थानीय व्यापारियों सहित ट्रक चालक एवं परिचालक के इस हड़ताल से या फिर युवक हैं इन सभी व्यक्तियों से राजनीतिक दलों के लोगों का कोई लेना देना ही नहीं है

जबकि इस पूरे हड़ताल से एक बड़ी आबादी काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है । सिंगरौली जिले के मोरवा में चल रहे सिंगरौली मोटर एसोसिएशन की हड़ताल को हफ्ते भर का समय बीत चुका है जबकि राजनीतिक दलों से सन लिप्त सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कई नामी-गिरामी हस्तियां मोरवा क्षेत्र में ही निवासरत हैं यहां तक कि सिंगरौली जिले के भाजपा विधायक राम लल्लू वैश्य मोरवा में ही रहते हैं इसके साथ ही भाजपा के जिला अध्यक्ष सहित भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी मोरवा क्षेत्र के ही निवासी हैं ऐसे में सत्ता पक्ष भी सिंगरौली मोटर एसोसिएशन की इस पीड़ा को देखना तो दूर समझने को भी तैयार नहीं है

अब यह सिंगरौली motor association मोटर एसोसिएशन के व्यवसायियों सहित ट्रक चालक एवं परिचालक के मन में नाराजगी घर करती जा रही है कई हजार लोगों को प्रभावित करने वाला यह निर्णय आगामी आने वाले विधानसभा चुनावों सहित लोकसभा चुनावों के लिए भी एक मुद्दा बन सकता है सिर्फ सत्ता पक्ष ही नहीं है खामोश इस पूरे मामले पर विपक्ष ने भी चुप्पी साध रखी है इसलिए यह नाराजगी सत्ता पक्ष एवं विपक्ष दोनों की तरफ इशारा कर रही है

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