सिंगरौली:फिर सुर्खियों में आया नगर निगम का प्रधानमंत्री आवास

Singrauli: The Prime Minister’s residence of the Municipal Corporation again came into the limelight

सिंगरौली: गरीबों को छत दिलाने के लिए शुरू की गई योजना प्रधानमंत्री(PM) आवास इन दिनों बिचौलियों एवं दलालों का कमाई का जरिया बनकर रह गई हैं ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सिंगरौली नगर निगम क्षेत्र में निर्मित बसंत विहार कॉलोनी में प्रधानमंत्री(PM) आवास योजना के हितग्राही एवं मकानों में रहने वाले रहवासियों से ऐसा प्रतीत हो रहा है एक तरफ जहां बिचौलियों एवं दलालों के द्वारा गरीबों के हक पर डाका डाला गया है

तो वहीं दूसरी तरफ नियमों को ठेंगा दिखाते हुए मनमाने तरीके से गरीबों के हक पर सेंधमारी की गई और यह सब कुछ नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के खुले संरक्षण के बिना होना तो संभव ही नहीं है ऐसे में नगर निगम के कर्तव्यनिष्ठ एवं बेहद ईमानदार कर्मचारियों के आचरण एवं कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है। प्रधानमंत्री(PM) आवास योजना के पात्र हितग्राहियों को लेकर जब हमारी टीम ने मौके पर जाकर मुरैना किया तो पाया कि हर आवास के नीचे पार्किंग में लगभग कई लग्जरी गाड़ियां

खड़ी मिली और यह सब शायद वही लोग हैं जो कि नगर निगम के अधिकारियों की नजर में बेहद गरीब है।

मामले की जांच होने पर खुलेंगे कई राज

पीएम आवास योजना के अंतर्गत जिस कदर भ्रष्टाचार की खेल को अंजाम दिया गया है

इस पूरे मामले पर यदि गहनता से जांच हो तो बहुत से पात्र हितग्राही अपात्र बनेंगे एवं नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा जिस तरह से भ्रष्टाचार के इस खेल को अंजाम दिया गया है उसे कई भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी कर्मचारी का चेहरा भी उजागर होगा परंतु विडंबना तो यह है कि इस पूरे मामले की जांच करने की जहमत शायद ही जिला प्रशासन सहित नगर निगम अमले के जिम्मेदार अधिकारी उठा पाएंगे

घरों में एसी सहित मौजूद है लग्जरी गाड़ियां-नगर निगम क्षेत्र गनियारी प्रधानमंत्री. (PM) आवास योजना के कॉलोनी में विजिट के दौरान हमने पाया कि कई मकानों में रहने वाले लोगों के पास में कई लग्जरी फोर व्हीलर गाड़ियां मौजूद है एवं इसके साथ ही इनके पास एयर कंडीशनर भी बाकायदा लगाया गया है ऐसे में जिन हितग्राहियों को या मकान प्रदान किया गया है वह किस श्रेणी में आते हैं शायद इसका अंदाजा भी नगर निगम के जिम्मेदारों के द्वारा नहीं लगाया गया या फिर यहां पर गरीब व्यक्तियों की परिभाषा ही बदल दी गई इस पूरे खेल में जिस तरह से नियमों को दरकिनार किया गया है

ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है बल्कि सूबे के मुखिया के द्वारा कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस मामले पर भी जिम्मेदारों को फटकार लगाई गई है विभागीय सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि संबंधित मामले में फर्जी तरीके से हासिल किए गए मकान को लेकर लोगों के ऊपर कानूनी कार्रवाई करने के लिए भी प्रयास किया गया था परंतु बिचौलियों के द्वारा यह मामला भी दबा दिया गया एवं इस पूरे खेल में किस तरह से दलालों और बिचौलियों को खुला संरक्षण दिया गया यह स्पष्ट हो जाता है।

कमाई का जरिया बना पीएम आवास

बसंत बिहार कॉलोनी में निर्मित प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित मकानों में दलालों ने चढ़ावे एवं पहुंच के दम पर गरीबों के हक पर सेंधमारी करते हुए मकान तो हासिल कर लिया एवं संबंधित मकान को अब किरायेदारों को देखकर किराया वसूला जा रहा है इतना ही नहीं पीएम आवास क्षेत्र में रहने वाले रहवासियों ने तो यहां तक बताया कि एक व्यक्ति के द्वारा कई मकान लिए गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ दो मकानों के बीच दीवार हटाकर उसे एक मकान में बदल दिया गया है।

जानें पूरा मामला -सिंगरौली जिले के नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 41 के गनियारी में निर्मित प्रधानमंत्री आवास योजना में जिस तरह से भरे शाही की गई वह बेहद चौंकाने वाला है दरअसल इस योजना के अंतर्गत ऐसे लोगों को आवास दिया जाना था जिनके पास छत मौजूद नहीं है एवं गरीब तबके के लोग हैं सरकार की यह मंशा अनुरूप कार्य भी शुरू हुआ एवं मकान बन कर तैयार भी हुए परंतु अब पात्रों को पात्र बनाकर मकान दे दिए गए नियमों को किस तरह से दरकिनार किया गया है

इसका अंदाजा भी आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस योजना के अंतर्गत जिले के स्थानीय गरीब परिवारों को मकान दिया जाना था परंतु सिंगरौली जिले के अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए अन्यत्र लोगों को भी या मकान बड़ी ही आसानी से उपलब्ध करा दिए गए और जिनको या मकान प्रदान किया गया उनमें से कई मकानों में वास्तविक मालिक के द्वारा मकान को किराए पर देकर किराया वसूला जा रहा है

एवं मकानों में रह रहे किरायेदारों से जब हमने बात की तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की एवं बताया कि जिनके नाम पर यह मकान है उनका खुद का भी नगर निगम क्षेत्र में ही मकान है वह भी एक नहीं कई मकान। ऐसे में इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि यहां अपात्र को भी नगर निगम के द्वारा पात्र बना दिया गया।

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