सिंगरौली:पर्यावरण को लेकर संजीदा नहीं दिख रहा सिंगरौली जिला Singrauli: Singrauli district is not showing serious about the environment

सिंगरौली: SINGRAULI जिले में जिस तरह से पर्यावरण असंतुलित हो चुका है एवं लगातार तेजी से बिगड़ते पर्यावरण के कारण एक तरफ जहां प्रदूषण हावी होता जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ अब इस भयंकर प्रदूषण की चपेट में आम जनमानस भी आता दिखाई पड़ रहा है दरअसल पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ ही अब जिले वासियों के लिए एक परेशानी का सबब बनती जा रही है

SINGRAULI सिंगरौली जिले में 80 के दशक से कंपनियों ने अपनी इकाइयों की स्थापना शुरू की थी जबकि 80 के दशक के पूर्व में सिंगरौली जिला सघन घने वनों से आच्छादित रहा है तब के समय में सिंगरौली जिले को काला पानी की भी संज्ञा दी जा चुकी थी एवं कंपनियों की स्थापना के बाद से कंपनियों के विस्तार को लेकर अंधाधुंध वृक्षों की कटाई शुरू हुई जिसके बाद तेजी से वृक्षों की कटाई का परिणाम यह हुआ कि आज पर्यावरण को संतुलित करने की सजा लोग भुगत रहे हैं।

 SINGRAULI वृक्षों की कटाई लगातार जारी Tree cutting continues

ऊर्जा धानी सिंगरौली में जिस तरह से अधिक इकाइयों के विस्तार हेतु बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई Tree cutting की गई जंगल को नष्ट कर दिया गया एक समय पर जहां सिंगरौली जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जंगली जानवरों का निवास स्थल हुआ करता था हिरण चीता भालू लकड़बग्घे आदि जंगलों में विचरण करते हुए दिखाई पड़ते थे तेजी से वृक्षों की कटाई Tree cutting एवं जंगलों के नष्ट होने के बाद अब यह जंगली जानवर दिखाई देना बंद हो चुके हैं

आपको बताते चलें कि सिंगरौली जिले में घने जंगलों की संख्या तेजी से घटी है जिन जंगलों में आमतौर पर चरवाहे दिन के समय जाने में कतराते थे अब उन जंगलों में लोगों ने आशियाना बनाना शुरू कर दिया है और यह सब कुछ हुआ है जमीनों को हथियाने एवं प्रशासनिक अमले की लापरवाही के कारण। तो वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक इकाइयों के विकास को लेकर क्षेत्र के कई हिस्सों में आज जिन कंपनियों की स्थापना हुई है कभी वहां पर सघन वृक्षों से गिरे जंगल हुआ करते थे जो पिक से शुद्ध हवा देते थे आज वहां पर प्रदूषण pollution उत्पन्न करने वाली इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं।

जल वायु एवं मृदा प्रदूषण की आगोश में In the lap of water, air and soil pollution

आज सिंगरौली जिले में दर्जनों इकाइयां स्थापित हैं जिले में अधिकतर इकाइयां जहां कोयले के उत्पादन को लेकर जानी जाती हैं तो वहीं दूसरी तरफ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला पावर प्लांट भी जिले में स्थापित है कोयला खदान एवं पावर प्लांट होने के कारण क्षेत्र में फ्लाई एस के साथ कार्बन Carbon उत्सर्जन एवं कोल डस्ट एवं कंपनियों से निकलने वाला जल भी प्रदूषित pollution हो चुका है

आमतौर पर सिंगरौली SINGRAULI जिले में सड़क मार्ग से होने वाले कोयले के परिवहन के कारण वाहनों से गिरने वाले कोयले के कारण मिट्टी प्रदूषित हुई एवं हवा के साथ यह कोयले के कारण आसपास के वृक्षों की पत्तियों पर मोटी परत के रूप में जमते गए इसके साथ ही सड़क के किनारे एवं नदी नालों तक जा पहुंचे हैं जिससे कि जल water स्रोत भी प्रदूषित हो चुका है एवं बलिया नाला जो कि सबसे ज्यादा प्रदूषित जल स्रोत है जो अपने साथ में पानी water के साथ कोयले के कणों को लेकर जलाशयों में पहुंच रहा है

मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित गोविंद बल्लभ पंत सागर डैम भी प्रदूषण pollution  से अछूता नहीं है एक तरफ जहां कुछ वर्ष पूर्व में NTPC एनटीपीसी का एस डाइक एवं रिलायंस जैसी कंपनी का फ्लाई एस डैम दुर्घटना का शिकार होने के बाद अपने अंदर समेटे हुए लाखो टन राख रिहंद डैम में समाहित हो गया

जिससे कि डैम के आसपास के क्षेत्र की भूमि सहित डैम में राख में जाने के कारण डैम का भी पानी प्रदूषित हो गया जबकि संबंधित डैम से ही कई परियोजनाएं अपने आवासीय परिसरों में पानी की सप्लाई कर रही है।

क्षेत्र में बढ़ रहे हैं रक्तचाप एवं मधुमेह के मरीज Blood pressure and diabetes patients are increasing in the area

क्षेत्र में तेजी से बढ़ते प्रदूषण एवं अनियमित दिनचर्या एवं गलत खानपान के कारण सिंगरौली जिले में अधिकतर लोग अब रक्तचाप एवं मधुमेह diabetes जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जानकार बताते हैं कि जिले में प्रदूषण के बढ़ते ग्राफ के कारण अब आमजन प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं और जिसका परिणाम यह हो रहा है कि लोगों को कई तरह की गंभीर बीमारियां अब घेरने लगी है

इसके साथ ही सिंगरौली जिले में अब लोग किडनी फेलियर या किडनी संबंधित जैसी गंभीर बीमारियों के भी शिकार हो रहे हैं हालात धीरे-धीरे चिंताजनक स्थिति निर्मित कर रहे हैं

सिंगरौली जिले में लगातार वृक्षों की कटाई के साथ पर्यावरण में प्रदूषण जैसी गंभीर स्थिति निर्मित हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार कंपनियों को वृक्षारोपण को लेकर जिस तरह से सघन अभियान चलाना था वह नहीं चलाया गया जिस कारण से वृक्षों की कटाई तो लगातार हो रही परंतु वृक्षारोपण ना होने के कारण अब पर्यावरण असंतुलित है यह बात अलग है कि हर वर्ष पर्यावरण दिवस से लेकर कुछ लोग वृक्षारोपण जरूर करते हैं परंतु कुछ देर तक के लिए ही सीमित होता है

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