SINGRAULI:सरकार के खजाने पर सेंधमारी कर रहीं खदानों में कार्यरत ओबी कंपनियां

जिम्मेदारों ने बंद की आंखें

SINGRAULI: कोयला एवं बिजली उत्पादन के लिए सिंगरौली जिला अपनी एक अलग पहचान बना चुका है सिंगरौली जिला देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता आ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ हम बात करें यदि जिले के नाम की तो जिला ऊर्जाधानी के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह जिला सरकार के खजाने को भरने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

गौरतलब हो कि मध्य प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व इंदौर जिला प्रदान करता है जो कि एक व्यापारिक नगरी है और इसके बाद में यदि मध्यप्रदेश का कोई दूसरा जिला है जो कि सबसे ज्यादा राजस्व प्रदान करता है अपनी औद्योगिक गतिविधियों को लेकर तो वह इंदौर के बाद सिंगरौली जिला ही है भले ही सरकार के खजाने को भरने में सिंगरौली अपनी एक अहम भूमिका निभाता है कई देश की नामी-गिरामी कंपनियां सिंगरौली जिले में स्थापित हैं तो वही सिंगरौली जिले में इन कंपनियों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला पेट्रोलियम पदार्थ की खपत भी काफी ज्यादा होती है इतना ही नहीं इन ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाले पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर जिले में लंबे अरसे से सीकेडी माफिया अपनी जड़े जिले में जमा चुका है

जिसे आज तक निस्ते नाबूत नहीं किया जा सका है कल तक जो सीकेडी माफिया एक छोटी पैमाने पर अपना कारोबार कर रहे थे आज यह काला कारोबार इतना फल फूल चुका है कि जिले के ही नहीं बल्कि संभाग एवं प्रदेश स्तर के अधिकारी भी इस पूरे मामले को जानते हुए भी इसकी कमर तोड़ने में असमर्थ रहे हैं अब इसके पीछे की वजह क्या है वह जांच का विषय है आखिरकार सिक्योरिटी माफिया पर प्रशासनिक मेहरबानी की वजह क्या है

यह तो जांच का विषय है एवं जांच के उपरांत ही इस तथ्य पर कुछ कहा जा सकता है एक बात तो साफ है इस पूरे काले कारोबार को करने वाले कारोबारियों की पकड़ प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सफेदपोश नेताओं तक काफी गहरी है और शायद उसी का यह परिणाम है कि इन पर कोई भी अधिकारी सीधे तौर पर हाथ डालने से कतराता रहता है।

खदानों में स्थित ओवरबर्डन कंपनियां लगा रहे करोड़ों का चूना

जिले की कोयला खदानों पर ओवरबर्डन का कार्य करने वाली ओवरबर्डन कंपनियां एक बार फिर सुर्खियों में है दरअसल इन कंपनियों का कार्य कोयले के ऊपर की मिट्टी को हटाने का है और इस मिट्टी को हटाने के लिए इन कंपनियों के द्वारा लगभग हजारों की तादाद में दतिया नमस्कार मशीनों सहित ट्रकों का प्रयोग किया जाता है और इन सारे मशीनों के कलपुर्जे को जान देने वाले डीजल इनकी प्रमुख जरूरत है और इन जरूरतों को पूरा करने के लिए इन कंपनियों को नियमितता डीजल डिपो से लिया जाना चाहिए था

परंतु ओवरबर्डन कि इन कंपनियों के द्वारा डीजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित पेट्रोल पंप पर ही निर्भर हो चुकी है ओवरबर्डन कंपनियों के द्वारा मंगाए जा रहे पेट्रोल पंप से डीजल को लेकर चर्चाओं का बाजार भी बेहद गर्म है दरअसल डीजल के जरूरतों को पूरा करने को लेकर ओवरबर्डन कंपनियों की पेट्रोल पंप संचालकों पर निर्भरता इस बात की तरफ इंगित करती है कि इस पूरे मामले पर एक बड़े काले खेल को अंजाम दिया जा रहा है

तो वही सिंगरौली जिले में कुछ ओवरबर्डन कंपनियों के द्वारा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से भी डीजल के टैंकर मंगाए जाते हैं जिससे कि सरकार को राजस्व में भारी क्षति पहुंचती है इन सबके बीच में अब इस खेल पर उत्तर प्रदेश की एसटीएफ की नजर पड़ने के बाद में अब इसका असर भी कंपनियों पर दिखने लगा है

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