SINGRAULI:मरने के बाद भी कई घंटों तक शव करती रही डॉक्टर का इंतजार

Singrauli: बरगवां चीरघर में रखी हुई शव का लम्बे इंतजार के बाद हुआ पोस्टमॉर्टेम  post mortem  दरअसल 18 अक्टूबर की दोपहर बरगवां थाना क्षेत्र के गड़ेरिया की नदी में राम जन्म साकेत की लाश संदिग्ध अवस्था में पाई गई थी जिसे पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम हेतु 18 तारीख की शाम को तकरीबन 6:00 से 7:00 के बीच बरगवां लाया गया देरी के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सकता था

इसलिए शव को बरगवां चीरघर में रखवा दिया गया परिजनों को यह बताया गया था कि 19 तारीख यानी बुधवार की सुबह डॉक्टर द्वारा मृत शरीर का पोस्टमार्टम. post mortem   किया जाएगा जिसके बाद आपको शव अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाएगा।, मगर 19 अक्टूबर की सुबह मृत शरीर के लिए परिजन तो पहुंचे मगर डॉक्टर नहीं।ऐसे में मृत व्यक्ति की लाश, एवं तीन पुत्रों सहित कई परिवार वाले एवं ग्रामीण डॉक्टर के इंतजार में घंटों तक बैठे रहे।और आपको जानकर हैरानी होगी की यह इंतजार तकरीबन 2:00 बजे तक चाला तब जाकर डाक्टर आए और पोस्ट मार्टम post mortem हो पाया।।

शव घर की नहीं है उत्तम व्यवस्था

SINGRAULI:बरगवां में मृत शरीर को रखने की कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है नदी किनारे बने एक छोटे एवं साधारण से रूम में मृत शरीर को रख दीया जाता है जिसके वज़ह से थोड़े ही देर में मृत शरीर सड़ने लगती है और उस से दुर्गंध आने की स्थिति निर्मित हो जाती है, ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौत के24 घंटे से भी ज्यादा का वक्त बीत जाने के बाद मृतक रामजन्म साकेत के मृत शरीर की हालत क्या रही होगी।

इतना ही नहीं अभी जब इतने लंबे इंतजार के बाद पोस्टमार्टम हुआ तो परिजनों के सामने एक और समस्या आकर खड़ी हो गई मृत शरीर को अंतिम संस्कार हेतु गांव तक पहुंचाने का कोई भी उपाय नजर नहीं आ रहा था, क्योंकि बरगवां में शव वाहन की भी कोई व्यवस्था नहीं है, पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को ही मृत्यु शरीर अपनी व्यवस्था से पहुंचाने का बाहर होता है,

और आसानी से मृत शरीर को ले जाने ले आने के लिए सभी वाहन चालाक तैयार भी नहीं होते हैं, ऐसे में आप यह अंदाजा लगा सकते हैं की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत के बाद मृत शरीर एवं परिजनों कि दुर्दशा किस हद तक हुई होगी। क्षेत्र में आए दिन असाधारण मौतों की खबर आती ही रहती है और भले ही डॉक्टर का इंतजार हर केश में ना करना पड़े मगर बाकी सारी समस्याओं से क्षेत्रीय लोगों को जूझना पड़ता है।।

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