organic and scientific farming नौकरी छोड़ खेती कर रहे भाइयों ने किया कमाल

  organic and scientific farming जैविक खेती कर कृषि को बनाया मुनाफे का धंधा 

organic and scientific farming : हमेशा से भारत कृषि प्रधान देश कहा जाता है यहां पर अधिकतर आबादी आज भी गांव में निवास करती है भारत के अधिकतर जनता कृषि पर आधारित है एवं अपने जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह कृषि कार्य पर ही निर्भर है लंबे समय से पुराने खेती के तरीकों ने एक तरफ जहां किसानों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं

तो वहीं दूसरी तरफ आज किसान बदहाली का शिकार होता जा रहा है ऐसे में वैज्ञानिक तरीके से खेती करना किसानों के लिए एकमात्र विकल्प बचा है एवं कई किसान ऐसे भी हैं जो कि लगातार वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर अपनी कमाई लाखों और करोड़ों रुपए में कर रहे हैं।

अधिकतर किसानों के द्वारा फसलों के उत्पादन के लिए रसायनिक खाद, जहरीले कीटनाश पदार्थो का उपयोग करने लगे है, जो कि इंसानों के स्वास्थ और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है ।इसी के साथ साथ वातावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है।

इन सभी चीजों को रोकने के लिए यदि किसान रसायनिक तरीको की जगह कृषि के जैविक तरीको का उपयोग करे, तो इन समस्याओ पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

शासन क्षेत्र के रहने वाले युवा ने अपनाए जैविक एवं वैज्ञानिक खेती

organic and scientific farming:सिंगरौली जिले के जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट का प्लांट और ठीक उसी प्लांट के पास में ही है युवा कृषक का खेत जहां पर काफी लंबे अरसे से बंजर पड़ी भूमि पर खेती करने का एक नायाब तरीका दिए हुए इसके सामने खेती के धंधे को लाभ का धंधा बना दिया

दर्शन युवा किसान के द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से खेती की शुरुआत की गई एवं एक तरफ जहां वैज्ञानिक पद्धति से कम लागत में बेहतर उत्पाद तो वहीं दूसरी तरफ रासायनिक खादों उससे दूरियां बनाते हुए इसके सामने चुनौतियों को पार करते हुए आज एक मिसाल पेश की है

एक तरफ जहां नौकरी छोड़ने के बाद यह युवा कृषक बेरोजगार हो गया गया था तो वहीं दूसरी तरफ आज इस युवा ने नौकरी से कहीं बेहतर मुनाफा कृषि के माध्यम से प्राप्त करना सीख लिया है इसके साथ ही वह 10 अन्य घरों के लोगों को रोजगार देने में भी सफल हुआ है

युवा कृषक की माने तो हर साल कृषि के माध्यम से वह लाखों रुपए कमा रहे हैं एवं अपने घर के स्थिति को खेती के माध्यम से संभाले हुए हैं युवा किसान के द्वारा उद्यानिकी विभाग से ड्रिप इरिगेशन का सिस्टम प्राप्त कर पौधों की सिंचाई के लिए प्रयोग किया है

आपको बताते चलें कि ड्रिप इरिगेशन पद्धति व पद्धति है जिसमें पौधों की जड़ों में पाइप की सहायता से पानी प्रदान किया जाता है एक तरफ पौधों को कम पानी में पौधों से बेहतर एवं ज्यादा उत्पाद की प्राप्ति हर साल यह किसान कर लेते हैं।

लौकी खीरा टमाटर एवं बींस की बंपर पैदावार Bumper yield of Gourd, Cucumber, Tomato and Beans

शासन क्षेत्र में युवा किसान के द्वारा की गई ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से वर्तमान में टमाटर लौकी खीरा एवं बींस सहित अन्य सब्जियां उगाई गई हैं क्योंकि इन सब्जियों को उगाने में किसी भी प्रकार की किसी भी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया गया है

अतः उगाई गई यह सब्जियां सेहत के लिए काफी अच्छी मानी जाती हैं जिसकी मांग भी बाजार में लगातार बढ़ती जा रही है। आपको बताते चलें कि खेती की वह विधी जिसमे रसायनिक उर्वरको एवं कीटनाशको के बिना या कम प्रयोग से फसलों का उत्पादन किया जाता है,

जैविक खेती कहलाती है।इसका अहम उद्देश्य मिट्टी की उर्वरक शक्ति बनाए रखने के साथ साथ फसलों का उत्पादन बढ़ाना है।जैविक खेती का मुख्य उद्देश्य यही है कि मिट्टी की उर्वरक शक्ति को नष्ट होने से बचाया जाए और खाने की चीजों जिनका उपयोग हम रोज करते है,

उनमे रसायनिक चीजों के इस्तेमाल को रोका जाए।फसलों को ऐसे पोषक तत्व उपलब्ध कराना, जो कि मृदा और फसलों मे अघुलनशील हो और सूक्ष्म जीवो पर असरदायक हो ।

जैविक खेती करने से फसल उत्पादन बढ़ता है, जिससे किसानो की आय भी बढ़ती है।भारत जैसे कृषि प्रधान देश मे यह बहुत ही आवश्यक है, कि किसान खेती के जैविक तरीको का इस्तेमाल करे, जिससे फसलों का उत्पादन बढ़े।

इससे विश्व मे खाद्य आपूर्ति की समस्या तो हल होगी ही साथ ही साथ किसानो का भौतिक स्तर भी सुधरेगा।भारत मे अधिकतर जगह खेती वर्षा पर आधारित है और आजकल वर्षा समय के अनुरूप नहीं हो रही, जिससे खेती को भी नुकसान होता है|

अगर किसानो द्वारा जैविक खेती को अपनाया जाए, तो इस समस्या से भी निजात पाया जा सकता है।इस प्रकार जैविक खेती के प्रयोग से उत्पादन तो कई गुना बढ़ता ही है, साथ ही साथ वातावरण को भी हानी नहीं पहुचती और खाने के लिए केमिकल मुक्त भोजन भी प्राप्त होता है,

जिससे स्वास्थ को भी हानी नहीं होती।आज के समय मे हमारे पास कई ऐसे उदाहरण मौजूद है, जिसने फसलों के उत्पादन को पहले से कई गुना बढ़ा दिया।

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