SINGRAULI Transport Department:दलालों के मकड़ जाल में फंसा है जिले का परिवहन विभाग

SINGRAULI Transport Department:: जिले में परिवहन विभाग परिवहन व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में एक अहम भूमिका निभाती है। परंतु सिंगरौली जिले में संचालित परिवहन कार्यालय इन दिनों अखबारों की सुर्खियां बटोर रहा है।

परिवहन कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों से ज्यादा दलालों की उपस्थिति देखी जाती है जिसके कारण जिले में परिवहन विभाग से संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहा है तो वही आम जनता को भी अपना परिवहन से संबंधित काम कराने में जेब ढीला करना पड़ रहा है। पिछले दिनों भी हमने जिले के परिवहन विभाग की खबरें बड़ी प्रमुखता से उठाई थी ।

SINGRAULI Transport Department: दलालों के मकड़ जाल में फंसा है जिले का परिवहन विभाग

जिले का परिवहन विभाग इन दिनों काफी चर्चाओं में है दलालों के मकड़जाल से परिवहन विभाग उभर ही नहीं पा रहा प्रदेश सरकार ने जन सुविधा के लिए सारी योजनाएं ऑनलाइन शुरू कर दी है

लेकिन सिंगरौली जिले में परिवहन विभाग में सारी सुविधाएं ऑनलाइन के बावजूद भी भोले-भाले लोग दलालों के चक्कर में फस कर मुंह मांगी कीमत चुका रहे हैं ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण पंजीकरण आदि में मनमाने रुपए वसूले जा रहे हैं।

नवागत परिवहन विभाग अधिकारी के पूर्व रहे आरटीओ अधिकारी की शक्ति से कुछ दिनों तक दलालों से लोगों को निजात मिली थी लेकिन अब फिर कार्यालय के आसपास इनका जमघट लगने लगा है

ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद विभिन्न हंसने से लोग दलालों की शरण में पहुंचकर अपने काम करा रहे हैं। परिवहन विभाग में कुछ लोगों ने जानकारी देते हुए बताया कि लाइसेंस के लिए लगभग 1675 की रसीद होती है जिसमें दलालों के माध्यम से आने वाले लोगों को कम से कम 3 से ₹4000 देना पड़ता है

SINGRAULI Transport Department:जिला मुख्यालय से कुछ दूर पर भ्रष्टाचार का गढ़ बना परिवहन विभाग

सिंगरौली जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूर पर स्थित है जिले का परिवहन विभाग जो इन दिनों भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है जहां अधिकारी सुबह से शाम तक कार्यालय से नदारद रहते हैं तो वही दलालों के सहारे चल रहा परिवहन विभाग।

परिवहन विभाग में घूम रहे दलाल लाइसेंस पंजीकरण फिटनेस ट्रांसफर आदि जिन कामों में समय लगता है उनको दलाल बड़ी आसानी से करा देते हैं जिसके एवज में मुंह मांगा पैसा जनता से ही लेते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन दलालों का बाहर से लेकर दफ्तर के अंदर तक बेधड़क दखल रहता है जिस पर परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।

इतना ही नहीं परिवहन विभाग मैं जहां सरकारी कर्मियों का जमावड़ा रहता है उनसे कहीं ज्यादा परमिट फिटनेस एवं लाइसेंस पंजीकरण सहित लाइसेंस के नवीनीकरण एवं फोटो की प्रक्रिया कराने वाले विभिन्न काउंटरों पर आम जनमानस से ज्यादा दलालों का ही जमावड़ा देखा जा रहा है

परिवहन विभाग में लाइसेंस बनवाने के लिए चक्कर काट रहे संदीप शाह से राज एक्सप्रेस टीम ने पूछा तो संदीप शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 दिनों से लाइसेंस बनवाने के लिए दफ्तर का चक्कर काट रहा हूं। लेकिन एक भी दिन जिला परिवहन अधिकारी से मुलाकात नहीं हो पाई थक हार कर मुझे दलालों का सहारा लेना पड़ा और जिसके एवज में मुझे 5000 का भुगतान करने के लिए बोला जा रहा।

SINGRAULI Transport Department:चंद पैसों में मिलते हैं मेडिकल सर्टिफिकेट

हैरानी की बात तो तब हो गई जब जिला परिवहन अधिकारी के दफ्तर के बाहर हमारी टीम ने सर्वे में पाया कि चंद पैसों में हैवी लाइसेंस में लगने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट चाय की दुकानों पर बिक रहे हैं

इसकी जानकारी बकायदा राज एक्सप्रेस टीम ने परिवहन अधिकारी विक्रम सिंह राठौर को दी तो उन्होंने मीडिया कर्मी को बताया कि इस पर जांच कराई जाएगी

हालांकि अब तक ना तो कोई जांच कराई गई और ना ही कोई नियम बनाई गई बल्कि भरे साही की तरह अब भी चना दुकान से लेकर दलालों के टेबल तक बिक रहे चंद पैसों में डॉक्टर द्वारा बनाए गए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट। जिस प्रतिष्ठित डॉक्टर की सील एवं लेटर का प्रयोग दलालों के द्वारा किया जा रहा है

उक्त मामले में संबंधित चिकित्सक से बात करने पर चिकित्सक ने बताया कि उनके द्वारा किसी भी व्यक्ति को हस्ताक्षर किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट जारी नही किये गए हैं । इस पूरे मामले की भनक ऐसा नहीं है

कि सरकारी मेहक में को नहीं वर्क आधा इसकी जानकारी जिले के जिम्मेदार अधिकारी को दी जा चुकी है हैरानी की बात तो यह है कि जो मेडिकल सर्टिफिकेट पहले ₹50 का दुकानों में आसानी से उपलब्ध हो जाता रहा है

अब इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने एवं परिवहन अधिकारी के संज्ञान में आने के बाद दुकानों में वही मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए ₹500 दलालों के द्वारा वसूला जा रहा है

तो वही परिवहन विभाग के अधिकारी द्वारा इस संबंधित मामले में कार्यवाही की बात कहने के उपरांत अब तक कार्यवाही ना होना भी इस बात की तरफ इंगित करता है कि संबंधित मामले में परिवहन अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है

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