Agri-Land Price Index: किसानों के लिए अच्छी खबर है। दरअसल ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से न तो किसानों को अपनी खेती योग्य जमीन की सही कीमत का पता चल पाता है और न ही सही कीमत मिल पाती है। अब इस समस्या का हल आ गया है। दरअसल IIM अहमदाबाद ने भारत का पहला कृषि भूमि मूल्य सूचकांक लॉन्च किया जो इस तरह के काम के लिए मदद मिलेगी।

मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय कृषि भूमि मूल्य सूचकांक (ISLPI)  भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) अहमदाबाद के  मिश्रा सेंटर फॉर फाइनेंशियल मार्केट्स एंड इकोनॉमी ने बनाया है। इसकी मदद से किसानों को उनकी जमीन की सही कीमत पता चलेगी। भारतीय कृषि भूमि मूल्य सूचकांक को गुरुवार को लॉन्च किया गया।

जानकारी के मुताबिक, ये सूचकांक ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जमीन की कीमतों का न्यूनतम मानदंड बताएगा। इस सूचकांक के लिए जो डेटा इकट्ठा किया जाएगा उसके लिए जमीन की कीमतों को लेकर काम करने वाली प्राइवेट फर्म एसफार्मस इंडिया करेगी।

ऐसे काम करेगा ये सूचकांक:

किसानों की जमीन की कीमत बताने के लिए  सूचकांक में अभी चार मुख्य फैक्टर्स शामिल किए गए हैं, जैसे- नजदीकी कस्बे से दूरी, नजदीकी एयरपोर्ट से दूरी, इंटरनेशनल एयरपोर्ट की संभावना आदि को शामिल किया गया है। अगर जमीन के पास सिंचाई की सुविधा है तो इसकी कीमत में 15 फीसदी की बढ़त होगी, वहीं अगर जमीन के पास इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने की संभावना दिखती है तो कीमत में 20 फीसदी की बढ़त होगी। इसी तरह कस्बे से दूर होने पर दूरी के हिसाब से प्रति किलोमीटर 0.5 फीसदी का असर पड़ेगा।

किसानों को नहीं मिलती सही कीमत:

प्रोजेक्ट लीड और IIM में रियल एस्टेट फाइनेंस के एसोसिएट प्रोफेसर प्रशांत दास ने इस बारे में कहा कि अभी तक किसानों को खेती की जमीन के बदले जो प्रतिफल या लाभ मिलता है वो बहुत कम है।  किसानों को खेती से होने वाली उपज के मुकाबले 0.5 से 2 फीसदी का लाभ मिल पा रहा है। ऐसे में इस सूचकांक की वजह से किसानों की खेती योग्य जमीन को बेचने के लिए काफी मिलेगी।

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