Gwalior Court – विशेष सत्र न्यायालय ने भोपाल के चिरायु मेडिकल कालेज में फर्जी तरीके से एमबीबीएम में प्रवेश लेने वाले तीन विद्यार्थियों के केस को किशोर न्याय बोर्ड में भेजने का आदेश दिया है। जब इन विद्यार्थियों ने फर्जीवाड़ा कर एमबीबीएस में प्रवेश लिया था, तब वह नाबालिग थे। इस आधार पर केस न्याय बोर्ड में चलेगा। इसके अलावा एक अन्य छात्रा का आवेदन खारिज कर दिया गया। छात्रा की प्रवेश के समय उम्र 18 वर्ष 29 दिन थी।

Gwalior Court  विशेष सत्र न्यायालय में सीबीआइ ने सात जनवरी 2021 को चिरायु मेडिकल कालेज के डायरेक्टर, तत्कालीन डीएमई सहित 60 लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था। इस चालान में 57 नए और तीन पुराने आरोपित हैं। चिरायु मेडिकल कालेज में शासन कोटे की 63 सीटें थी। वर्ष 2011 में 47 सीटों को गलत तरीके से खाली रखा गया। मेडिकल कालेज ने सीटों को बेच दिया था।

ऐसे विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया, जिन्होंने काउंसलिंग में भाग नहीं लिया था। व्यापम कांड के खुलासे के वक्त झांसी रोड थाने में तीन लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। एसआइटी ने तीन लोगों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी थी।

वर्ष 2015 में यह केस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ के हैंडओवर हो गया। Gwalior Court सीबीआइ ने सरकारी कोटे की सीट छोड़ने वाले, सीट खरीदने वाले, चिरायु मेडिकल कालेज के प्रबंधन के अधिकारी, बिचौलियों के खिलाफ केस दर्ज किया।
इस मामले के आरोपितों पर न्यायालय में आरोप तय करने की कार्रवाई चल रही है।

दीक्षा चाचरिया, सुमित चौहान, नेहिल निगम, मानसी शर्मा ने आवेदन पेश किया कि घटना के दिनांक को वे नाबालिग थे। इसलिए उनके केस किशोर न्याय बोर्ड में भेजे जाएं। मानसी शर्मा की उम्र घटना दिनांक को 18 वर्ष 29 दिन थी। उसका आवेदन खारिज कर दिया। ट्रायल विशेष न्यायालय में चलेगी। जबकि दीक्षा चाचरिया, सुमित चौहान, नेहिल निगम के खिलाफ केस किशोर न्याय बोर्ड में चलेगा। इन्होंने 30 सितंबर 2011 को चिरायु मेडिकल कालेज में प्रवेश लिया था, तब इनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी।

Gwalior Court कोर्ट ने एएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जांचः हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए पुलिस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को तलाशने के लिए पुलिस की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। रोजनामचा भरने की खानापूर्ति की गई है।

इसलिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को इस मामले की जांच दी जाए। छह जून को पुलिस अधीक्षक ग्वालियर को शपथ पत्र भी पेश करना होगा। 15 साल की नाबालिग गायब है। भंवरपुरा थाने में इसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। इस नाबालिग को भारत सिंह व रामसहाय पर बंधक बनाने का आरोप लगाया है। Gwalior Court  नाबालिग को इन दोनों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है।

-पूर्व शासकीय अधिवक्ता भारत सिंह कौरव के अनुसार यदि कोई नाबालिग अपराध करता है तो उसे सुधार गृह में रखा जाता है। अपराध में अधिकतम सजा दो साल है, जो सजा होती है, वह जेल में नहीं काटनी होती है।

-पीएमटी फर्जीवाड़े में धाराएं लगाई गई हैं, उनमें अधिकतम सजा पांच साल की हो रही है। जिन आरोपितों के केस किशोर न्याय बोर्ड में चलेंगे, उन्हें सजा के वर्षों में फायदा होगा। इन्हें दो साल तक सजा मिल सकती है।

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