इसे सयोंग कहे या लूट खसोट के तहत प्रयोग

बलिया ब्यूरो चीफ अनिल सिंह

बलिया – जिले में पिछले कई सालों से तत्कालीन सरकारों से लेकर बर्तमान सरकार तक जनहित की सुरक्षा हेतु कटान रोधी कार्यो के लिए कई करोड़ो रुपए खर्च किए गए ।

तत्कालीन बाढ़ विभाग के अधिकारियों द्वारा गाय घाट में कराए गए कटान रोधी कार्यो से लेकर आज तक के विभागीय अधिकारियों द्वारा दुबे छपरा , उदयी छपरा तक कराए गए कटान रोधी कार्य कई सवालिया निशान छोड़ गए । सरकार के अधिकारियों द्वारा कई करोड़ो रुपए कटान रोधी बचाव कार्य के नाम पर पानी मे बहा दिए गए । लेकिन इससे आम जनता का कभी भला नही हो सका ।

गंगा का कटान रोकने के लिए स्पर पर स्पर बनते गए ,गंगा के कटान का करवा चलता रहा , दर्जनों गांव गंगा के कटान में विलीन होते गए । लोगों का पुस्तैनी आशियाना उजड़ता गया , विस्थापित कटान पीड़ित सरकारी बैंक के कर्जदार होते गए । और अधिकारी, जनप्रतिनिधि,ठेकेदार मालामाल होते गए । ऐसा कटान रोधी बचाव कार्य बलिया में ही ज्यादा देखने को मिलता है । यह आम जनता के दिलोदिमाग पर यक्ष प्रश्न है ।

स्थानीय दर्जनों गांव के कटान पीड़ितों की माने तो लोगों का कहना है , कि जिले के गैर जिमेदार जनप्रतिनिधियों व विभागीय उच्च अधिकारियों की मिलीभगत तथा कार्य दायीं संस्था के ठेकेदारों की लापरवाही , कमीशनखोरी का नतीजा है की लगभग अरबो रुपया कटान रोधी कार्य के नाम पानी मे बहा दिया गया ।

लेकिन आम जनता को कटान रोधी कार्यो से कोई लाभ नही मिला । इसका जीता जागता उदाहरण पिछले दो सालों में रामगढ़ के सोनार टोला से लेकर दुबे छपरा तक पचासों करोड़ो रुपए खर्च करके आधे अधूरे बनाए गए स्पर और कई मीटर के रिवेटमेंट का कराया गया कटान रोधी कार्य पूरी तरह से गंगा में विलीन हो गया ।

और गंगा का कटान गोपालपुर में स्थित कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान तथा बालिका विद्यालय दुबे छपरा के समीप पहुच गया । विभागीय अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के ठेकेदारों की यह लापरवाही रही कि योगी सरकार द्वारा जनहित की सुरक्षा हेतु कटान रोधी बचाव कार्यो लिए दिया गया

पूरा पैसा विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों द्वारा बचाव कार्य के नाम पर पानी मे बहा दिया गया । बावजूद इसके एनएच 31 सड़क सहित कई गांवों के कटान के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता ।

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